भारत में श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। “कोड ऑन वेजेस 2019” को नवंबर 2025 से पूरे देश में लागू कर दिया गया है, जिससे पुराना न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 समाप्त हो गया है। इस नए कानून का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब हर श्रमिक को न्यूनतम मजदूरी पाने का कानूनी अधिकार मिलेगा, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में काम करता हो। इससे खासतौर पर असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी और 50 प्रतिशत नियम
इस कानून के तहत केंद्र सरकार ने “नेशनल फ्लोर वेज” की अवधारणा लागू की है, जो न्यूनतम मजदूरी का आधार तय करती है। वर्तमान में यह दर ₹178 प्रतिदिन के आसपास रखी गई है। इसका मतलब यह है कि कोई भी राज्य सरकार इससे कम मजदूरी तय नहीं कर सकती। इसके साथ ही वेतन की संरचना में भी बदलाव किया गया है। अब किसी भी कर्मचारी का मूल वेतन और महंगाई भत्ता मिलाकर कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत होना जरूरी है। इससे कंपनियों द्वारा वेतन को कम दिखाने के लिए भत्तों का गलत उपयोग करने पर रोक लगेगी।
किन श्रमिकों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
नए कानून का सबसे बड़ा फायदा उन श्रमिकों को होगा जो पहले किसी कानूनी सुरक्षा के दायरे में नहीं थे। अब निर्माण कार्य, कृषि, फैक्ट्री, सेवा क्षेत्र और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोग भी इस कानून के तहत आएंगे। इसके अलावा श्रमिकों को उनकी कौशल के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, जैसे अकुशल, अर्धकुशल, कुशल और अत्यधिक कुशल। हर श्रेणी के लिए अलग मजदूरी दर तय की जाएगी, जिससे उन्हें उनके काम के अनुसार उचित भुगतान मिल सके।
राज्यों में मजदूरी दरों की स्थिति
भारत के अलग-अलग राज्यों में मजदूरी दरें वहां की आर्थिक स्थिति और महंगाई के अनुसार तय की जाती हैं। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में अकुशल श्रमिकों के लिए ₹18,000 से अधिक और कुशल श्रमिकों के लिए ₹22,000 से ज्यादा मासिक मजदूरी तय की गई है। अन्य राज्यों जैसे ओडिशा, गोवा, झारखंड और आंध्र प्रदेश ने भी महंगाई भत्ते के आधार पर नई मजदूरी दरें लागू की हैं। इसलिए श्रमिकों को समय-समय पर अपने राज्य की आधिकारिक जानकारी देखना जरूरी है।
नियोक्ताओं की जिम्मेदारी और सख्त नियम
इस कानून में नियोक्ताओं की जिम्मेदारी को भी बढ़ाया गया है। अब निरीक्षण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया गया है और नियमों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। कर्मचारियों को समय पर वेतन देना अनिवार्य किया गया है और किसी भी उल्लंघन पर जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, श्रमिकों को अपने अधिकारों के लिए कानूनी सहायता लेने का पूरा अधिकार दिया गया है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई मजदूरी दरें और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं और राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। सही और अद्यतन जानकारी के लिए कृपया संबंधित सरकारी वेबसाइट या अपने राज्य के श्रम विभाग से संपर्क करें।









